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साइबर ठगों की अब खैर नहीं! केंद्र सरकार ने WhatsApp को दिए डिवाइस ID ब्लॉक करने के निर्देश

Digital arrest scam

सांकेतिक तस्वीर

Digital Arrest Scam: आज के डिजिटल दौर में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है, जहां ठग सोशल मीडिया के जरिए लोगों को झांसे में लेकर करोड़ों की ठगी कर रहे हैं. खासतौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे बढ़ते स्कैम को रोकने के लिए सरकार ने अब सख्त कदम उठाया है. सरकार ने वॉट्सऐप को उन सभी डिवाइस IDs को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है, जिनका इस्तेमाल इस तरह की धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है. दरअसल, इस तरह की ठगी में वॉट्सऐप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, जहां जालसाज पीड़ितों को कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज करके डराते हैं और उन्हें अपना शिकार बनाते हैं.

साइबर अपराधियों के लिए सरकार का बड़ा फैसला

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली साइबर विंग इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है. दरअसल, साइबर ठग पकड़े जाने के डर से बार-बार नए अकाउंट और नंबरों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. इसी को देखते हुए अब सरकार सीधे उनके डिवाइस के स्तर पर ही रोक लगाने की तैयारी कर रही है, ताकि अपराधी नया अकाउंट बनाने के बावजूद उस फोन का इस्तेमाल ठगी के लिए न कर सकें.

जल्द आएगा व्हाट्सऐप में नया सेफ्टी फीचर

व्हाट्सऐप यूजर्स को साइबर ठगी से बचाने के लिए कंपनी जल्द ही एक नया सेफ्टी फीचर लाने वाली है, जो Skype जैसे प्लेटफॉर्म्स की तरह फेक कॉलर्स की पहचान और स्कैम नेटवर्क का पता लगाने में मदद करेगा. IT Rules 2021 के अनुसार, डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा 180 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है, ताकि साइबर पुलिस को जांच में सहायता मिल सके. इसके अलावा, फर्जी और फेक APK ऐप्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं.

डिवाइस IDs क्या होता है? 

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डिजिटल अरेस्ट क्या है?

अब आपके मन में यह सवाल होगा कि आखिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ क्या होता है. दरअसल, इस स्कैम के जरिए ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते-धमकाते हैं और उनसे मोटी रकम वसूलते हैं. जालसाज व्हाट्सऐप पर बार-बार नए अकाउंट बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं और उनसे पैसों की मांग करते हैं. यदि कोई व्यक्ति पैसे देने से मना करता है, तो उसे गिरफ्तार करने की धमकी दी जाती है. इसके बाद ठग पीड़ित को पूछताछ के लिए दूसरे शहर आने का दबाव बनाते हैं. जब पीड़ित वहां जाने में असमर्थता जताता है, तो ठग ‘मदद’ करने के बहाने केस रफा-दफा करने के लिए ऑनलाइन पैसे ठग लेते हैं.

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