Supreme Court: दिल्ली सरकार के वकील ने SC के सामने कहा था कि पटाखा बैन को पूरे साल लागू करने का फैसला सभी संबंधित विभागों से सलाह करने के बाद लिया जाएगा. SC के जस्टिस अभय ओक और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने दिल्ली पुलिस से कहा, 'दिल्ली पुलिस ने प्रतिबंधों को गंभीरता से लागू नहीं करवाया.'
इसके बाद मई 2023 में तलाक के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से फैसला सुनाया. इसमें कहा गया कि किसी मामले में संविधान के आर्टिकल-142 के तहत सुप्रीम कोर्ट सीधे तलाक का फैसला दे सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में हुए बुलडोजर एक्शन के मामले पर फैसला सुनाते हुए योगी सरकार को मुआवजा देने का आदेश भी दिया. कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों के घरों को बिना नोटिस के तोड़ा गया है, उन्हें 25 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए.
Supreme Court: बुधवार को सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने इस बात पर चिंता जताई कि मामले में कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 9 जजों की बेंच ने यह फैसला दिया. उन्होंने कहा कि सभी निजी संपत्तियां भौतिक संसाधन नहीं हैं और इसलिए इन पर सरकार का कब्ज़ा करना ठीक नहीं होगा.
इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में करीब 16,000 मान्यता प्राप्त मदरसों को राहत मिली है. उत्तर प्रदेश में कुल 23,500 मदरसे हैं, जिनमें से लगभग 16,500 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं, और इनमें 560 मदरसे सरकारी अनुदान प्राप्त करते हैं.
Supreme Court: एससी ने मदरसा एक्ट को संवैधानिक बताया है. सुप्रीम कोर्ट ने 'उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004' की संवैधानिक वैधता बरकरार रखा है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 22 मार्च के फैसले को रद्द कर दिया है.
CJI DY Chandrachud: सोमवार को इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के एक कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने कई सवालों का जवाब देते हुए बताया कि कुछ प्रेशर ग्रुप हैं जो मीडिया का उपयोग करके अदालतों पर दबाव डालते हैं.
Supreme Court On Air Pollution: दिल्ली में प्रदुषण का स्तर काफी बढ़ गया है. दिल्ली में बढ़े प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार और पुलिस से दिवाली के दौरान पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंध पर 'तत्काल' प्रतिक्रिया मांगी है.
Somnath Buldozer Action: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक मुस्लिम संगठन ने कोर्ट में दावा किया है कि 1903 में यह जमीन उन्हें दे दी गई थी. मुस्लिम संगठन के इस दावे को गुजरात सरकार ने झूठा बताया है. सरकार ने कहा यह जमीन सोमनाथ ट्रस्ट की थी. ट्रस्ट उसे काफी पहले सरकार को सौंप चुका है.