राजनीतिक दृष्टि से इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि मध्यप्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से करीब डेढ़ से दो साल पहले यह समिति सक्रिय हो जाएगी.