Maha Kumbh 2025: संगम नगरी प्रयागराज में आस्था का ऐसा उदाहरण देखने को मिला है, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है. यहां एक 12 साल के बाल संत कड़ाके की ठंड में तप कर रहे हैं.
Maha Kumbh 2025: महाकुंभ के पहले दिन करोड़ों श्रद्धालुओं ने संगम तट पर डुबकी लगाई है. इन श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या विदेशियों की भी है, जो सनातन धर्म से सराबोर दिख रहे हैं.
'चाय वाले बाबा' का सबसे बड़ा काम है, आईएएस की तैयारी कर रहे छात्रों की मदद करना. इनका काम कोई साधारण नहीं है. यह बाबा व्हाट्सएप के जरिए बच्चों को स्टडी मटेरियल भेजते हैं और उनकी तैयारियों में मदद करते हैं.
बस श्रद्धालुओं को उनके चुने गए स्थान से लेकर प्रयागराज तक जाएगी. वहां पहुंचने के बाद श्रद्धालु महाकुंभ में स्नान करेंगे और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेंगे. स्नान के बाद, बस उन्हें वापस उनके स्थान पर छोड़ने के लिए लौटेगी.
महाकुंभ 2025 के दौरान प्रयागराज में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए कई प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं, जो अलग-अलग बजट और जरूरतों के अनुसार उपलब्ध हैं. चाहे आप सस्ते होमस्टे या धर्मशाला में रुकने का विकल्प चुनें, या फिर अधिक सुविधाजनक और लक्जरी टेंट और डोम सिटी का चयन करें, सभी के लिए यहां कोई न कोई व्यवस्था है.
राम मंदिर के निर्माण के बाद, अब मथुरा और काशी जैसे अन्य धार्मिक स्थलों का मुद्दा भी उभर सकता है. RSS और VHP के नेतृत्व में महाकुंभ में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है कि कैसे अन्य विवादित धार्मिक स्थलों पर भी न्याय मिल सकता है और इन स्थानों को धर्म की रक्षा के रूप में पुनर्निर्मित किया जा सकता है.
प्रयागराज में पीएम महाकुंभ 2025 के लिए 5500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत की है. पीएम गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम का दर्शन और पूजा के बाद, पीएम लेटे हनुमान जी के भी दर्शन किए.
महाकुंभ मेला 2025 में प्रयागराज में 12 साल बाद आयोजित हो रहा है, जो 13 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा. इस मौके पर लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करने के लिए जुटेंगे.
मथुरा के मंदिरों ने मिठाइयों की जगह फल और फूलों को प्रसाद के रूप में अपनाने का निर्णय लिया है. धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने बताया कि शुद्ध और प्राकृतिक प्रसादम पर लौटने की यह पहल आस्था की शुद्धता को बनाए रखने के लिए की गई है.
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