Nishant Kumar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार लंबे समय से राजनीति में कदम रखने की चर्चा का केंद्र बने हुए हैं.
Bihar Welfare Schemes: नीतीश ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की घोषणा की है. इस योजना के तहत बिहार के करीब 3 करोड़ परिवारों की एक महिला को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी. यह पैसा उन्हें अपना छोटा-मोटा काम शुरू करने के लिए दिया जाएगा और खास बात यह है कि इसे वापस नहीं करना होगा.
Bihar Election 2025: 2023 के अंत तक 'इंडिया' गठबंधन की गाड़ी पटरी पर थी, लेकिन दिसंबर में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव नतीजों ने माहौल बिगाड़ दिया. भाजपा ने तीन राज्यों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा. इस हार ने विपक्षी दलों में बेचैनी बढ़ा दी.
चिराग पासवान और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बीच हुई तारीफों के आदान-प्रदान ने भी अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है. दोनों ही नीतीश सरकार के आलोचक हैं. हालांकि, चिराग ने साफ कर दिया है कि उनकी पहली प्राथमिकता NDA है, लेकिन इन मुलाकातों से भविष्य में किसी नए गठबंधन की संभावना को नकारा नहीं जा सकता.
नीतीश के इन एलानों का असर तभी होगा, जब ये जमीनी स्तर पर लागू होंगे. मुफ्त बिजली और वेतन वृद्धि का खजाना कहां से आएगा, ये बड़ा सवाल है. अगर इन योजनाओं में देरी हुई या खामियां सामने आईं, तो जनता का भरोसा डगमगा सकता है. साथ ही, नीतीश की बार-बार गठबंधन बदलने की आदत और उनकी "स्वास्थ्य" पर विपक्ष के तंज उनकी विश्वसनीयता को कमजोर कर रहे हैं.
Bihar News: नीतीश कुमार ने ऐलान किया कि पत्रकारों को दी जाने वाली पत्रकार सम्मान पेंशन राशि को 6 हजार प्रति माह से बढ़ाकर 15 हजार प्रति माह कर दिया गया है.
Bihar Election 2025: विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव बहिष्कार की धमकी दी है. उन्होंने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ NDA और चुनाव आयोग मिलकर मतदाता सूची में हेरफेर कर रहे हैं.
Bihar Monsson Session 2025: तेजस्वी यादव ने मतदाता सत्यापन के लिए मांगे जा रहे 11 दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधा. इस दौरान मुख्यमंत्री और तेजस्वी के बीच तीखी बहस हुई.
बिहार में कुल अपराधों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, हत्या जैसे जघन्य अपराधों में लालू-राबड़ी के दौर के मुकाबले करीब 40% की कमी आई है. लेकिन, हाल के कुछ सालों में चोरी, डकैती और हत्या जैसी घटनाओं में इजाफा जरूर देखा गया है.
सिक्के का दूसरा पहलू ये है कि सरकार पर इस "फ्री" बिजली का भारी बोझ पड़ने वाला है. जब सरकार मुफ्त में कुछ देती है, तो इसका मतलब ये नहीं कि उसकी कोई लागत नहीं होती. बल्कि, उस लागत को टैक्सपेयर्स यानी हम और आप जैसे लोग ही किसी न किसी रूप में चुकाते हैं.