शिक्षा के क्षेत्र में भी पहल की गई है. वर्ष 2025 में विभिन्न कक्षाओं में 1007 बंदियों ने अध्ययन किया, 550 बंदी हिंदी राष्ट्रभाषा परीक्षा में शामिल हुए. 6,646 बंदियों को साक्षर बनाया गया. सरकार का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य बंदियों का पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है.
जेल महानिदेशक (सुधारात्मक सेवाएं) डॉ. वरूण कपूर ने रिहा होने वाले कैदियों से अपील की है कि वे रिहाई के बाद अपराध को छोड़कर अपने परिवार एवं समाज में पुनर्स्थापित हों. साथ ही अपने परिवार, समाज एवं प्रदेश के निर्माण में सहभागी बनें.