CG News: छत्तीसगढ़ के बस्तर से नक्सलियों की डोर टूटते जा रही है, क्योंकि सरकार द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में जहां एक ओर लगातार सफलताएं मिल रही है. वहीं बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा से जुड़ने सरेंडर कर रहे है.
Naxali Surrender: छत्तीसगढ़ में लगातार नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं. इसी बीजापुर में 25 लाख के इनामी SZCM के साथ 25, कांकेर में 62 लाख के 13, दन्तेवाड़ा में 15 और नारायणपुर 8 नक्सलियों ने सरेंडर किया है.
Kanker: कांकेर ज़िला मुख्यालय से 40 किमी दूर आमाबेड़ा क्षेत्र अंतर्गत चंगोड़ी से नागरबेडा होते हुए आमाबेड़ा उप तहसील तक जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री सड़क योजना अंतर्गत लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से 10 किमी डामर का सड़क निर्माण किया गया है. 10 किमी सड़क निर्माण के दूसरे ही दिन 2 किमी की सड़क उखड़ गई.
Naxal Encounter: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे है. इसी बीच कांकेर जिले के छोटे बेठिया इलाके में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में एक महिला नक्सली ढेर हो गई है.
CG News: कांकेर जिले का कोयलीबेड़ा ब्लाक अंतर्गत पानीडोबीर गांव में नक्सलियों का मजबूत LOS का गढ़ था, लेकिन अब इसी गढ़ में एक निजी बैंक खुल गया है.
CG News: कांकेर जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मुरागांव के आश्रित गांव पूसाझर की बसाहट है इस गांव में करीब 20-25 परिवार निवासरत हैं. उनके गांव पहुचने तक सड़क नहीं है. पिछले आठ सालों से ग्रामीण इसी तरह श्रम दान से सड़क बनाते आ रहे है.
CG Board Result: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल(CGBSE) ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. वहीं 10 वीं में कांकेर की इशिका बाला ने 99.16% अंक लाकर टॉप किया. जिसे ब्लड कैंसर हैं, और उसने इससे जंग लड़ते हुए ये सफलता हासिल की है.
CG News: भारत सरकार की भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत कांकेर में हो रहे सड़क निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार ने ड्राइवर को जमकर पीटा है. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
Kanker: कांकेर में लोन दिलाने के नाम पर 3 करोड़ 72 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा मामला सामने आया है. पूरे गिरोह का कांकेर पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जगहों से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
Marka Pandum: आदिवासी चैतरई पर्व में आमाजोगानी परंपरा का निर्वाह किया जाता है. इसके पहले प्रकृति पूजक आदिवासी समाज के लोग आम का सेवन नहीं करते. यहां आदिवासी लोग पेड़ों से आम तोड़ना तो दूर खुद से गिरे आम भी तब तक नहीं खाते जब तक चैतरई पर्व न मना लें.