इजरायल और ईरान के बीच यह जंग आज 10वें दिन में प्रवेश कर चुकी है. इन 10 दिनों में दोनों देशों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा. इस संघर्ष ने तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को भी बढ़ा दिया है.
मोसाद की योजना थी कि सद्दाम को किसी सार्वजनिक जगह पर मारा जाए, ताकि इससे इराक और बाकी देशों को एक कड़ा संदेश मिले. उन्होंने फैसला किया कि सद्दाम पर हमला तब किया जाएगा जब वो किसी भीड़ वाली जगह पर मौजूद हों. इस बेहद मुश्किल और खतरनाक काम के लिए इजरायल की सबसे खास और काबिल कमांडो यूनिट सायरेट मटकल (Sayeret Matkal) को चुना गया.
ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना अमेरिका का एक पुराना एजेंडा रहा है, जिसकी मुख्य वजहें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, मध्य पूर्व में उसका बढ़ता क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकारों की स्थिति हैं. अमेरिका इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आमतौर पर आर्थिक प्रतिबंधों को मुख्य हथियार बनाता है, ताकि ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो और जनता में असंतोष बढ़े.
Israel Iran War: ट्रंप ने जी-7 समिट के बीच लौटने के बाद बड़ा बयान दिया और कहा कि अमेरिका का धैर्य समाप्त हो रहा है. ईरान न्यूक्लियर हथियार नहीं रख सकता है.
सैन्य खुफिया निदेशालय और इजरायली एयर फोर्स के संयुक्त अभियान में कमांड सेंटर को टारगेट करते हुए हवाई हमला किया गया, जिसमें अली शादमानी की मौत हो गई.
इजरायल को अपनी रक्षा का हक G7 देशों, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका ने अपने साझा बयान में दिल खोलकर इजरायल के साथ खड़े होने की बात कही. उन्होंने साफ कहा कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है.
साल 1979 में ईरान में एक बड़ी क्रांति हुई. राजा का शासन खत्म हो गया और अयातुल्ला खुमैनी के नेतृत्व में एक इस्लामिक सरकार आई. इस नई सरकार ने इजरायल को अपना सबसे बड़ा दुश्मन घोषित कर दिया. उन्होंने कहा कि इजरायल ने जबरदस्ती फिलिस्तीनी ज़मीन पर कब्ज़ा किया है, और वे फिलिस्तीनियों का समर्थन करेंगे.
भारत के ईरान और इजरायल दोनों के साथ अच्छे व्यापारिक संबंध हैं. हम इजरायल को कई चीजें बेचते हैं और उनसे रक्षा उपकरण, ड्रोन जैसी तकनीक खरीदते हैं. वहीं, ईरान से तेल, सूखे मेवे जैसी चीजें आती हैं.
चीन और ईरान का रिश्ता कोई नया नहीं है. दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सैन्य सहयोग का लंबा इतिहास रहा है. चीन पहले ही साफ कर चुका है कि वो इस जंग में ईरान के साथ खड़ा है.
इजराइल के हमलों से बौखलाए ईरान ने तुरंत बड़ा कदम उठाया. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने ऐलान किया कि अमेरिका के साथ चल रही परमाणु वार्ता को तत्काल रद्द किया जाता है. ये वार्ता पिछले एक महीने से चल रही थी, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने की कोशिश हो रही थी.