Chhath 2025: एक लोककथा के अनुसार, एक नि:संतान दंपति ने छठी मइया की पूजा की और उन्हें संतान प्राप्त हुई. इसीलिए यह पर्व संतान की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए भी खास माना जाता है. छठ पूजा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पर्यावरण से भी जुड़ा है.
Bihar Election 2025: बिहार में लागू आचार संहिता के उल्लंघन का पहला केस दर्ज किया गया है. यहां निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर पैसे बांटने के आरोप में FIR दर्ज की गई है. जानें पूरा मामला-
Mahagathbandhan Seat Sharing Formula: बिहार की 243 सीटों पर सबकी नजरें टिकी हैं. पिछली बार 2020 में RJD ने 144 सीटों पर तीर चलाए थे, लेकिन इस बार वे थोड़ा 'समझदार भाई' बनकर 125-130 सीटों पर संतुष्ट हैं. क्यों? क्योंकि गठबंधन के छोटे भाई-बहनों को भी तो जगह देनी है.
Bihar Election 2025: चिराग पासवान भी 20-22 सीटों वाले फॉर्मूले पर राजी नहीं हैं. पार्टी 40 सीटों की डिमांड कर रही है और इस कारण बातचीत अटकी हुई है.
भाजपा और राजद दोनों दलों ने चुनाव आयोग से कहा था कि मतदान दो चरणों में ही कराए जाएं. बता दें कि 2020 में बिहार में विधानसभा चुनाव तीन चरणों में संपन्न हुए थे.
अब 2025 में तस्वीर क्या है? लेटेस्ट सर्वे कहते हैं कि NDA को हल्की बढ़त, लेकिन टक्कर कांटे की होगी. JVC का पोल बताता है कि NDA को 41-45% वोट और 131-150 सीटें मिल सकती हैं. वहीं, महागठबंधन को 37-40% वोट शेयर और 81-103 सीटें मिल सकती हैं.
Bihar Politics: आरजेडी का कोर यादव (14%) और मुस्लिम (17%) यानी 20 साल से 'MY फैक्टर' पर टिका है, जो 2020 में 75 सीटें दिला गया. तेजस्वी, लालू के लाल, अब 'युवा आइकन' हैं. 2019-2024 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने 'BAAP' फॉर्मूला (बहुजन-अगड़ा-आधी आबादी-गरीब) आजमाया, AI वीडियो और मीम्स से डिजिटल कैंपेन चलाया.
CM Mahila Rojgar Yojana 1st kist : सपना सिर्फ बिजनेस शुरू करने का नहीं, उसे बुलंदियों तक ले जाने का भी है. इसीलिए सरकार इस योजना के तहत बिहार के ग्रामीण हाट-बाजारों को और विकसित करेगी. इससे आपके बनाए प्रोडक्ट्स को सही बाजार और सही दाम मिलेंगे.
Bihar Congress: बिहार में कांग्रेस महागठबंधन का हिस्सा है, जिसमें राजद और वाम दल जैसे सहयोगी हैं. लेकिन अगर पार्टी के अंदर ही एकजुटता नहीं होगी, तो गठबंधन की ताकत भी कमजोर पड़ सकती है. 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 19 सीटें जीत पाई.
मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा कोई नई पार्टी नहीं है. 2015 में नीतीश कुमार के साथ टकराव के बाद बनी यह पार्टी अब 10 साल की हो चुकी है, लेकिन अभी तक 'गैर-मान्यता प्राप्त' का तमगा लगाए घूम रही है.