एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के 70 निर्वाचित विधायकों में से 31 के खिलाफ आपराधिक मामले हैं, जिसमें 17 विधायक गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं. इन आरोपों में हत्या के प्रयास और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर मामले शामिल हैं.
अब बात करते हैं इंडिया गठबंधन के भविष्य की, जिसे दिल्ली चुनाव के बाद से लेकर कई बार सवालों के घेरे में देखा गया है. कांग्रेस और AAP के बीच के संघर्ष ने इस गठबंधन की एकजुटता और सामूहिक लक्ष्य को पूरी तरह से चुनौती दी है. जब दो प्रमुख दल आपस में लड़ रहे थे, तो भाजपा को इस लड़ाई में आसानी से फायदा हुआ और उसका राजनीतिक ग्राफ बढ़ा.
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी को बड़ी जीत मिली है. देश के राजधानी में 27 साल बाद बीजेपी की सरकार बनने जा रही है.
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में अरविंद केजरीवाल की जीत के बाद उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर था. वो सोचने लगे थे कि दिल्ली में अब उनकी पार्टी को कोई चुनौती नहीं दे सकता, क्योंकि कांग्रेस और बीजेपी दोनों को उन्होंने खारिज कर दिया था. लेकिन ये सोचते हुए वे भूल गए कि राजनीति में आराम करना, खतरनाक हो सकता है.
दिल्ली चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत के बाद राज्यों के कार्यकर्ताओं में भी जश्न का माहौल है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाया.
राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने स्वीकार किया कि दिल्ली अब भाजपा की हो गई है। जनता ही तय करती है कि किसे चुनना है और किसे नहीं।
BJP की जीत पर प्रधानमंत्री Narendra Modi खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 'जनशक्ति सर्वोपरि' है. उन्होंने कहा दिल्ली की जनता ने विकास को चुना है.
बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली के सभी सात सीटों पर जीत हासिल की थी, और पार्टी का लक्ष्य दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी यही सफलता दोहराने का है. बीजेपी का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर है.
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 54.35% वोट मिले, AAP को 24.17% वोट मिले, और कांग्रेस को 18.91% वोट मिले थे. हालांकि, AAP और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन विधानसभा चुनाव में दोनों अलग-अलग चुनावी मैदान में हैं.
दिलचस्प यह है कि इस बार फलोदी सट्टा बाजार ने कांग्रेस पार्टी को चुनावी मुकाबले से बाहर होते हुए दिखाया है. पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस को लेकर बाजार के अनुमानों में हलचल बनी रहती थी, लेकिन इस बार कांग्रेस की स्थिति सट्टा बाजार में बेहद कमजोर मानी जा रही है.