‘अच्छे सवाल पूछिए…’, वर्ल्ड कप ट्रॉफी मंदिर लेकर जाने वाली कीर्ति आजाद की टिप्पणी पर ईशान किशन का जवाब
ईशान किशान, भारतीय क्रिकेटर
Ishan Kishan on Kirti Azad: टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में टीम इंडिया की जीत में अहम योगदान देने वाले आक्रामक बल्लेबाज ईशान किशन मंगलवार को पटना पहुंचे. यहां एयरपोर्ट पर ईशान किशन का जबरदस्त तरीके से स्वागत किया गया. इस दौरान वे मीडिया से भी मुखातिब हुए. ईशान किशन से वर्ल्ड कप ट्राफी को मंदिर तक ले जाने के मामले पर कीर्ति आजाद की टिप्पणी पर सवाल किया गया. हालांकि इस पर उन्होंने बड़े ही शांत तरीके से जवाब दिया. ईशान किशन ने कहा कि अच्छे सवाल पूछिए, इस पर मैं क्या कह सकता हूं.
‘आगे खेलते रहना है और जीतते रहना है’
ईशान किशन ने कहा, ‘टीम जीती है, बहुत अच्छी बात है. ये हमारे लिए ही नहीं पूरे देश के लिए बहुत अच्छी बात है. हम उम्मीद करेंगे और आगे ऐसे ही जीतते रहे. मैं चाहता हूं कि जैसे मैं यहां से आगे बढ़ा, वैसे ही दूसरे खिलाड़ी भी यहां से निकले. आपको बस मेहनत करना है और आप कहीं से भी आगे बढ़ सकते हैं.’
वहीं कीर्ति आजाद के मंदिर में ट्रॉफी लेकर जाने पर ईशान किशन ने कहा, ‘हम इतना अच्छा वर्ल्ड कप जीते हैं. अच्छा सवाल आप लोग करें. अब कीर्ति आजाद क्या बोले हैं, इस पर मैं क्या जवाब दूं. अब आगे बस खेलते रहना है, रन बनाते रहना है और जीतते रहना है.’
#WATCH | Patna, Bihar | On India's ICCT20WorldCup2026 win, Indian cricketer Ishan Kishan says, "It is a great thing for the entire nation and we hope that we play and win the same way in the future as well… I try that more players get inspired to advance ahead…"
— ANI (@ANI) March 10, 2026
On former… pic.twitter.com/MfBmqyvMfY
कीर्ति आजाद ने क्या कहा था?
दरअसल वर्ल्ड कप जीतने के बाद अहमदाबाद में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्य कुमार यादव, मुख्य कोच गौतम गंभीर और क्रिकेट प्रशासक जय शाह ट्रॉफी लेकर मंदिर पहुंचे थे. जिसको लेकर काफी चर्चा हुई थी. वहीं ट्रॉफी लेकर मंदिर जाने पर पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल उठाए थे.
कीर्ति आजाद ने कहा था, ‘टीम इंडिया पर शर्म आती है! जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई खिलाड़ी थे. हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत (हिंदुस्तान) में लेकर आए थे. भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं? ये टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है ना कि सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का. संजू सैमसन टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाडी थे. वे ट्रॉफी को चर्च नहीं ले गए. यह ट्राफी हर धर्म के भारतीयों की है. किसी एक धर्म की जीत का जश्न मनाने की जगह नहीं है.’
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