MP News: मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी समुदाय के अलग धर्म कोड की मांग को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है. आदिवासी समुदाय को लेकर उमंग सिंघार ने कहा कि समय आ गया है कि हम सभी आदिवासी एकजुट हों. यदि अभी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आदिवासी समाज ने अपने अलग धर्म कोड की मांग के लिए अधिक से अधिक आवेदन नहीं भेजे, तो हमारी पहचान को किसी अन्य धर्म की श्रेणी में दर्ज कर दिया जाएगा.
सिंघार ने आगे कहा कि मैं अपने सभी आदिवासी भाई-बहनों से आग्रह करता हूं कि बड़ी संख्या में धर्म कोड की मांग के समर्थन में फॉर्म भरकर राष्ट्रपति महोदया तक अपनी आवाज़ पहुंचाएं, ताकि हमारी सांस्कृतिक पहचान और परंपरा को उचित मान्यता मिल सके.
समय आ गया है कि हम सभी आदिवासी एकजुट हों। यदि अभी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आदिवासी समाज ने अपने अलग धर्म कोड की मांग के लिए अधिक से अधिक आवेदन नहीं भेजे, तो हमारी पहचान को किसी अन्य धर्म की श्रेणी में दर्ज कर दिया जाएगा।
— Umang Singhar (@UmangSinghar) March 9, 2026
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उमंग सिंघार के बयान पर विश्वास सारंग का पलटवार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आदिवासियों को लेकर दिए गए बयान पर मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा विघटन की राजनीति करती है. नेता प्रतिपक्ष का बयान आपत्तिजनक और गैरकानूनी है. वे आदिवासियों को धमका रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि उमंग सिंघार संवैधानिक प्रक्रिया में अड़चन डाल रहे हैं और ये गैरकानूनी है.
मंत्री ने आगे कहा कि राहुल गांधी संविधान की बात करते हैं क्या वे उनके नेता प्रतिपक्ष हो हटाएंगे. उन्होंने कहा कि जनगणना के काम में षड्यंत्र रचा जा रहा है. क्रिमिनल केस दर्ज होना चाहिए. आदिवासियों को गुमराह करने की राजनीति कांग्रेस करती है. फूट डालों आगे बढ़ो की नीति पर काम करती है. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष भोले-भाले आदिवासियों को बरगला रहे हैं.
पहले भी दिया भगवान राम को लेकर बड़ा बयान
ऐसा नहीं है नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पहली बार आदिवासी समुदाय को लेकर इस तरह की आवाज उठाई हो. इससे पहले भी सिंघार ने आदिवासी अधिकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि भगवान हनुमान और भगवान राम की वानर सेना आदिवासी ही थे.
सिंघार ने आगे कहा कि ”रामायण में राम जी की सेना की बात होने लगी तो आदिवासियों को वानर बना दिया. रामायण में कहा गया कि जंगल के अंदर एक शबरी मिली थी जो राम को बेर खिलाती है, इसका मतलब क्या एक ही आदिवासी थी पूरे जंगल में? नहीं, जितने भी लोग सेवा में राम के साथ थे, सब आदिवासी थे. राम को अगर जिताया है तो आदिवासियों ने जिताया है.”
हनुमान जी आदिवासी थे – सिंघार
भगवान हनुमान जी को आदिवासी बताते हुए उमंग सिंघार ने कहा था कि ” हम हनुमान जी की पूजा करते हैं. गांव-गांव हनुमान जी के मंदिर हैं, जो हमारे वंशज है. उन्होंने आगे कहा कि मैं तो कहता हूं कि वह भी हमारे हैं, वह भी आदिवासी हैं.
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