MP News: देशभर में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के वित्तीय सशक्तिकरण के लिए सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशें 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रही हैं. लेकिन मध्यप्रदेश में इन सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार अब तक छठे राज्य वित्त आयोग का गठन नहीं कर पाई है.
ग्रामीण, शहरी निकायों को 7.91 लाख करोड़ से ज्यादा देने की सिफारिश
सोलहवें वित्त आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए देशभर के ग्रामीण और शहरी निकायों को कुल 7.91 लाख करोड़ रुपए से अधिक देने की सिफारिश की है. इसमें से 4.35 लाख करोड़ ग्रामीण निकायों और करीब 3.56 लाख करोड़ नगरीय निकायों के लिए प्रस्तावित हैं. इन सिफारिशों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देना और बुनियादी सेवाओं को मजबूत करना है. मध्य प्रदेश में इन सिफारिशों के अनुरूप राशि वितरण के लिए राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें जरूरी होती हैं. यही आयोग राज्य के विभाजनीय कोष से पंचायतों और नगर निकायों के बीच धन के बंटवारे का आधार तय करता है. लेकिन आयोग के गठन में हो रही देरी से स्थानीय निकायों को समय पर राशि आवंटन में दिक्कत आ सकती है.
राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही आयोग का गठन संभव होगा
जानकारी के अनुसार, राज्य के वित्त विभाग ने छठे राज्य वित्त आयोग के गठन का प्रस्ताव अगस्त 2025 में मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजा था. वहां से यह प्रस्ताव राजभवन पहुंच चुका है, लेकिन आठ महीने बाद भी आयोग के गठन को मंजूरी नहीं मिल पाई है. अब राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही आयोग का गठन संभव होगा. वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द आयोग का गठन नहीं होता, तो वर्ष 2026-27 के लिए राशि का आवंटन पांचवें राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर किया जा सकता है. हालांकि यह केवल एक अस्थायी व्यवस्था होगी.
क्या है राज्य वित्त आयोग की भूमिका?
राज्य वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 243-आई के तहत हर पांच साल में किया जाता है. इसका मुख्य काम पंचायतों और नगर निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना और राज्य के कर राजस्व (विभाजनीय कोष) में से उनके हिस्से की सिफारिश करना होता है. आयोग स्थानीय निकायों को संसाधनों के बेहतर उपयोग, सेवाओं में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने के लिए भी दिशा-निर्देश देता है. इसकी सिफारिशों के आधार पर स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं को मजबूत किया जाता है.
प्रक्रिया में छह महीने लग सकते हैं
विशेषज्ञों के मुताबिक, आयोग के गठन के बाद उसकी रिपोर्ट तैयार होने और उसे लागू करने में छह महीने से अधिक का समय लग सकता है. ऐसे में यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ, तो नई वित्तीय व्यवस्था लागू होने में देरी तय मानी जा रही है. आयोग की संरचना राज्य वित्त आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम चार सदस्य होते हैं, जिन्हें राज्यपाल की अनुशंसा पर सरकार नियुक्त करती है. आमतौर पर आयोग का अध्यक्ष अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी या वित्त विशेषज्ञ होता है. आयोग अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपता है, जिसे बाद में विधानसभा में पेश कर लागू किया जाता है.
ये भी पढ़ें: MP News: आगर-मालवा में पेट्रोल पंप के पास कार में लगी आग, कर्मचारियों की सूझ-बूझ से टला हादसा
