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Rewa News: मध्य प्रदेश के रीवा का यह ग्रामीण स्कूल बना अनोखा, एक ही स्कूल के सात बच्चों ने किया कमाल

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छात्र राष्ट्रीय मींस कम मेरिट परीक्षा में सिलेक्ट हुए

Rewa News: मध्य प्रदेश में जहां एक तरफ ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करना एक चुनौती बन रही है. लगातार बच्चों की संख्या स्कूलों से गायब हो रही है साथ ही ग्रामीण इलाकों की स्कूलों में अव्यवस्था और अभाव की तस्वीर भी आपने बहुत देखी होगी. वही रीवा के ग्रामीण अंचल का एक स्कूल जिसने शिक्षा को लेकर एक अलग अलख जगाई है.

सात छात्र राष्ट्रीय मींस कम मेरिट परीक्षा में चयनित हुए

दरअसल, रीवा मुख्यालय से दूर ग्रामीण इलाके के एक ही स्कूल से सात बच्चों ने राष्ट्रीय मींस कम मेरिट परीक्षा में चयनित हो गए. मध्य प्रदेश के हजारों छात्रों ने आवेदन किया था, रीवा के शासकीय विद्यालय धोचट के ग्रामीण परिवेश इन बच्चों ने एक अलग नाम दिया है. एक तरफ जहां ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था सुधार एक चुनौती बन गया अक्सर अवस्थाएं स्कूलों में चरम पर दिखती है, लेकिन इन तमाम अभाव के बीच इन बच्चों का चयन अनोखा है. इन बच्चों की आंखों में सपना पल रहे बच्चों का कहना है कि यह इंजीनियर या फिर डॉक्टर बनना चाहते हैं.

स्कूल की शिक्षिका ने क्या कहा?

स्कूल की शिक्षिका का कहना है कि यह बच्चे बेहद अभाव में शिक्षा ग्रहण करते हैं. ज्यादातर बच्चों के माता-पिता मजदूरी का काम करते हैं और इनका घर में वह अत्याधुनिक सुविधाएं नहीं मिल पाती जो जरूरी होती है. लेकिन इसके बाद भी शिक्षा के प्रति इन बच्चों का रुझान और इनका चयन यह बताता है कि मध्य प्रदेश सरकार के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा में सुधार के प्रयास सफल हो रहे हैं.

ग्रामीण बच्चे भी आगे बढ़ रहे

यानी अब कहा जाए ग्रामीण भारत में शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहां छात्र सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत और सामुदायिक सहयोग से शिक्षा में अव्वल आ रहे हैं. शिक्षा के प्रति जागरूकता, डिजिटल तकनीक का उपयोग और सरकारी व निजी प्रयासों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे, जो कभी सुविधाओं के अभाव में पीछे रह जाते थे, अब अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं.

ग्रामीण शिक्षा में सकारात्मक बदलाव के प्रमुख कारण

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प्रेरणा और संघर्ष

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