राज्यसभा दौड़ से जीतू पटवारी बाहर, अब मीनाक्षी नटराजन सहित इन दावेदारों पर निगाहें
जीतू पटवारी
Bhopal News: मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट के लिए सियासी हलचल तेज हो गई है. फिलहाल यह सीट वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के पास है, जिनका कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है. लेकिन उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि वे दोबारा राज्यसभा नहीं जाना चाहते और पार्टी के निर्देश पर संगठनात्मक व राजनीतिक काम में सक्रिय रहेंगे.
पटवारी ने भी राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया
इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में चल रहा था, लेकिन पटवारी ने भी राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारियां इतनी ज्यादा हैं कि उनके लिए 24 घंटे भी कम पड़ रहे हैं, ऐसे में वे संगठनात्मक काम पर ही ध्यान देना चाहते हैं. पटवारी के इनकार के बाद कांग्रेस में नए दावेदारों के नाम चर्चा में आ गए हैं. इनमें पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के नाम भी सामने आ रहे हैं.
मजबूत दावेदार के रूप में पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नाम
हालांकि पार्टी के भीतर सबसे मजबूत दावेदार के रूप में पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. बताया जा रहा है कि उनके नाम पर हाईकमान और प्रदेश स्तर पर भी चर्चा हो चुकी है. उधर भाजपा भी इस सीट को लेकर रणनीति बनाने में जुटी है. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा नेता कुछ विधायकों से संपर्क साध रहे हैं, ताकि चुनाव के दौरान राजनीतिक समीकरण अपने पक्ष में किए जा सकें.
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की है. दरअसल, द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मध्यप्रदेश में कांग्रेस के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी थी. उस समय कई नेताओं ने “अंतरात्मा की आवाज” का हवाला देते हुए मुर्मू के पक्ष में मतदान किया था.
कांग्रेस के लिए सबसे अहम चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे अहम चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखना होगी. कमलनाथ सरकार गिरने के बाद से प्रदेश में कांग्रेस लगातार कमजोर हुई है और लोकसभा से लेकर राज्यसभा चुनाव तक उसे कई बार नुकसान उठाना पड़ा है. ऐसे में इस बार राज्यसभा सीट पर जीत कांग्रेस के लिए सिर्फ राजनीतिक प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है.