MP News: मध्य प्रदेश में गरीब और दूरदराज के आदिवासी परिवारों के लिए बिजली कनेक्शन लेना अब आसान हो जाएगा. मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए नए कनेक्शन के लिए स्मार्ट या प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता को मार्च 2028 तक टाल दिया है. इस निर्णय से विशेष पिछड़ी जनजातियों और ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा.
बिजली कंपनियों को राहत दी
अब तक नियम था कि हर नए बिजली कनेक्शन के लिए स्मार्ट या प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य होगा. लेकिन जमीनी स्तर पर नेटवर्क की कमी, तकनीकी ढांचे का अभाव और उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण दूरदराज गांवों में यह व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही थी. इसके चलते कई जरूरतमंद परिवार बिजली कनेक्शन से वंचित रह जाते थे. आयोग ने इन व्यावहारिक समस्याओं को स्वीकार करते हुए बिजली कंपनियों को राहत दी है. अब कंपनियां नए कनेक्शन देने और खराब या जले हुए मीटर बदलने के लिए पारंपरिक (कन्वेंशनल) मीटर या नॉन-स्मार्ट प्रीपेड मीटर का उपयोग कर सकेंगी. खासतौर पर उन ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां नेटवर्क सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां यह व्यवस्था लागू की जाएगी.
स्मार्ट मीटर सिर्फ मशीन नहीं, पूरा सिस्टम!
बिजली कंपनियों ने आयोग को बताया कि स्मार्ट मीटर केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि एक पूरा डिजिटल इकोसिस्टम है. इसमें सर्वर, नेटवर्क कनेक्टिविटी और बिलिंग इंटीग्रेशन जैसी सुविधाएं जरूरी होती हैं. इन व्यवस्थाओं के बिना स्मार्ट मीटर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकते. साथ ही, देशभर में बढ़ती मांग के कारण स्मार्ट मीटर की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है.
कंपनियों की प्रगति और लक्ष्य
मध्य प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियां ईस्ट, सेंट्रल और वेस्ट डिस्कॉम अपने-अपने क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम कर रही हैं, लेकिन अभी लक्ष्य से काफी पीछे हैं.
- ईस्ट डिस्कॉम: 56.50 लाख लक्ष्य, 25.90 लाख अवार्ड
- सेंट्रल डिस्कॉम: 41.35 लाख लक्ष्य, 20.99 लाख अवार्ड
- वेस्ट डिस्कॉम: 39.84 लाख लक्ष्य, लगभग 11.75 लाख अवार्ड
इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की गई है, जो 2026 से 2027 तक फैली हुई है.
लाइन लॉस कम करने की कवायद
मध्य प्रदेश में बिजली चोरी और लाइन लॉस के कारण वितरण कंपनियों को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान होता है. इसी घाटे को कम करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, ताकि उपभोग की सटीक निगरानी हो सके. आयोग ने कंपनियों को अगले दो वर्षों में लाइन लॉस 10 से 15 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य भी दिया है. हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए आयोग का यह फैसला आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें बिजली कनेक्शन के लिए स्मार्ट मीटर लगने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
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