MP News: सड़क के साथ PWD विभाग की छवि सुधारने की तैयारी, निर्माण सामग्री और कार्य गुणवत्ता की होगी सख्त जांच
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MP News: लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है. अब विभाग द्वारा कराए जाने वाले निर्माण कार्यों और उनमें उपयोग होने वाली सामग्री का परीक्षण विभागीय प्रयोगशालाओं और इंपैनल्ड लैब में अनिवार्य रूप से कराया जाएगा. इसके लिए वर्ष 2019 में जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन कर दिया गया है.
कम से कम 10 फीसदी काम का होगा परीक्षण
विभाग के उपसचिव एआर सिंह ने प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग, भवन के प्रमुख अभियंता, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम और मध्य प्रदेश भवन विकास निगम के प्रबंध संचालकों को निर्देश जारी किए हैं. आदेश में कहा गया है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मॉर्थ रिवीजन-5 के चैप्टर 900 और निर्धारित आवृत्ति के अनुसार कम से कम 10 प्रतिशत कार्यों का परीक्षण कराया जाएगा.
इसमें से कुछ परीक्षण विभाग की मंडल और परिक्षेत्र स्तर की प्रयोगशालाओं में तथा शेष विभाग द्वारा इंपैनल की गई एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के माध्यम से कराए जाएंगे. सभी परीक्षणों से संबंधित प्रविष्टियां वर्क्स मैनेजमेंट सिस्टम में दर्ज करना अनिवार्य होगा. साथ ही सभी कार्यपालन यंत्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि सामग्री परीक्षण निर्धारित अनुपात में कराते हुए उसकी जानकारी सिस्टम में दर्ज कराई जाए. नई व्यवस्था के तहत यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य रूप से लागू होगी.
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इस तरह होगा परीक्षण-निरीक्षण
- निर्माण के दौरान फाउंडेशन कार्य में कोर कटिंग कर सैंपल टेस्टिंग कराई जाएगी.
- सभी परीक्षणों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी और रिपोर्ट में जियोटैग फोटो लगाए जाएंगे.
- विभागीय निर्माण कार्यों में वाटरप्रूफ प्लाई की शटरिंग अनिवार्य होगी.
- ज्वाइंट्स की विशेष जांच की जाएगी, ताकि सीमेंट स्लरी का रिसाव न हो.
- शटरिंग कार्यों में स्टील प्रॉप्स का उपयोग अनिवार्य रहेगा.
- लकड़ी की बल्लियों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है.