MP में सिंहस्थ से पहले 7500 पुलिस आरक्षकों की भर्ती, 22000 पद खाली, PHQ ने राज्य सरकार को भेजा प्रस्ताव

MP News: नई भर्ती के लिए बोर्ड गठन की प्रक्रिया भी जारी है. पुलिस मुख्यालय ने इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास विचार के लिए भेजा है. बोर्ड के गठन के बाद कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2026 आयोजित कराई जा सकती है.
MP Police Headquarters.

MP पुलिस मुख्यालय

MP News: मध्य प्रदेश में पुलिस बल की कमी को दूर करने के लिए पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने राज्य सरकार को बड़ा प्रस्ताव भेजा है. प्रस्ताव के अनुसार प्रदेश में खाली पड़े 22,500 पुलिस आरक्षक पदों में से पहले चरण में 7,500 आरक्षकों की भर्ती की जाएगी. यह भर्ती सिंहस्थ से पहले कराने की योजना बनाई गई है, ताकि बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा सके.

प्रस्ताव पर मंजूरी के बाद होगी भर्ती

सूत्रों के मुताबिक पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2026 में 7,500 आरक्षकों की भर्ती का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है. प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. प्रदेश में सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन से पहले पुलिस बल में रिक्त पदों को भरना प्राथमिकता माना जा रहा है.

अंतिम चरण में है 2025 की भर्ती परीक्षा

इस बीच पुलिस भर्ती-2025 की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा पूरी हो चुकी है और अब अंतिम परिणाम का इंतजार है. पुलिस मुख्यालय का मानना है कि नई भर्ती के साथ-साथ हर साल होने वाली नियमित नियुक्तियों से बल में रिक्त पदों की संख्या धीरे-धीरे कम की जा सकेगी. पुलिस विभाग के अनुसार हर वर्ष करीब 4 हजार पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जिससे लगातार नए पद खाली होते रहते हैं.

भर्ती बोर्ड गठन के बाद तेज होगी प्रक्रिया

नई भर्ती के लिए बोर्ड गठन की प्रक्रिया भी जारी है. पुलिस मुख्यालय ने इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास विचार के लिए भेजा है. बोर्ड के गठन के बाद कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2026 आयोजित कराई जा सकती है.

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2027 तक पूरी करने का लक्ष्य

सिंहस्थ अप्रैल 2028 में प्रस्तावित है. इसे देखते हुए पुलिस मुख्यालय का लक्ष्य है कि अगस्त 2027 तक भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, ताकि नए चयनित आरक्षकों का प्रशिक्षण भी समय पर पूरा हो सके. प्रदेश की पुलिस प्रशिक्षण संस्थाओं में वर्तमान में लगभग 8 हजार प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने की क्षमता है, जिससे बड़ी संख्या में नए आरक्षकों को प्रशिक्षित किया जा सकेगा.

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