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Bhopal: भोपाल में होली की तैयारियां तेज, 1500 से ज्यादा जगहों पर होगा होलिका दहन, 4 मार्च को रंगोत्सव

holi dahan

होलिका दहन

Bhopal News: राजधानी में होली पर्व को लेकर तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं. शहर के अलग-अलग हिस्सों में करीब 1500 स्थानों पर होलिका दहन की व्यवस्था की जा रही है. नगर निगम और जिला प्रशासन की निगरानी में वार्ड स्तर पर अंतिम तैयारियां पूरी की जा रही हैं. कई क्षेत्रों में परंपरा के अनुसार निर्धारित मुहूर्त पर होलिका दहन होगा, जबकि प्रमुख स्थानों पर शुभ समय के अनुसार देर रात अग्नि प्रज्वलित की जाएगी.

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

इस बार भी पर्यावरण संरक्षण और गोवंश संवर्धन को प्राथमिकता देते हुए गोकाष्ठ से होलिका दहन को प्रोत्साहित किया जा रहा है. दैनिक भास्कर समूह और गोकाष्ठ संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के सहयोग से शहर में 47 स्थानों पर गोकाष्ठ की बिक्री के लिए केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि लोग लकड़ी की बजाय पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपना सकें.

2 मार्च की रात शुभ मुहूर्त में दहन

ज्योतिष मठ संस्थान द्वारा आयोजित हालिया वेब संगोष्ठी में देशभर के पंचांग विशेषज्ञों और ज्योतिषाचार्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 2 मार्च की रात होलिका दहन किया जाएगा और 4 मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा. संस्थान के संचालक पंडित विनोद गौतम के अनुसार, 2 मार्च को रात 2 बजे के बाद भद्रा पुच्छकाल समाप्त होने पर ही होलिका दहन शुभ रहेगा. उन्होंने बताया कि 3 मार्च की रात तक पूर्णिमा समाप्त होकर प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो जाएगी और उसी दिन ग्रहण का सूतक प्रभावी रहेगा. शास्त्रों में ग्रहणकाल की रात्रि को अशुभ माना गया है, इसलिए उस समय होलिका दहन को शुभ नहीं माना जाता.

4 मार्च को निकलेंगे चल समारोह

होली के अवसर पर 4 मार्च को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक चल समारोह और रंग-गुलाल के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. दयानंद चौक से हिंदू उत्सव समिति द्वारा भव्य होली जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें राधा-कृष्ण और भोलेनाथ की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी. जुमेराती, करोद, कोलार, संत नगर और भेल क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में भी उत्सव का माहौल देखने को मिलेगा.

सामाजिक सद्भाव का संदेश

इसके साथ ही कई वार्डों में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समितियों की पहल पर सर्वधर्म सहभागिता के साथ होलिका दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. विभिन्न समुदायों की भागीदारी से सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश देने की परंपरा इस वर्ष भी जारी रहेगी.

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