आसिफ खान, कुशीनगर
उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को सख्ती से लागू करते हुए कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी और मिसाल पेश करने वाली कार्रवाई की है. जनता के साथ अन्याय और विभाग की छवि धूमिल करने वाले दरोगा के खिलाफ एसपी ने न केवल तत्काल निलंबन की कार्रवाई की, बल्कि पीड़ित की तहरीर पर उसी थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज करा दिया. इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है.
वायरल ऑडियो से खुला रिश्वतखोरी का मामला
पूरा मामला तरया सुजान थाना क्षेत्र का है, जहां तैनात उप-निरीक्षक आलोक कुमार सिंह का रिश्वत मांगने से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. वायरल ऑडियो में दरोगा एक प्रकरण की विवेचना के बदले पैसों की मांग करता सुनाई दे रहा था. ऑडियो सामने आते ही आमजन में आक्रोश फैल गया और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे.
एसपी ने लिया त्वरित संज्ञान, तत्काल किया निलंबित
जैसे ही मामला एसपी केशव कुमार के संज्ञान में आया, उन्होंने बिना किसी देरी के आरोपी दरोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. साथ ही पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए. प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की गई.
पीड़ित की तहरीर पर उसी थाने में दर्ज हुई FIR
कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं रही. पीड़ित द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर आरोपी दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. खास बात यह है कि FIR उसी थाने में दर्ज की गई जहां वह तैनात था. इस कदम ने स्पष्ट कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषियों को हर हाल में जवाबदेह ठहराया जाएगा.
पहले से विवादों में रही कार्यशैली
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, आरोपी दरोगा का व्यवहार आम जनता के प्रति पहले से ही अभद्र और कठोर बताया जाता रहा है. थाने आने वाले फरियादियों के साथ बदसलूकी करना, अनावश्यक दबाव बनाना और मामलों में लेन-देन की चर्चाएं क्षेत्र में आम थीं. लोगों द्वारा मौखिक शिकायतें भी की जाती रहीं, लेकिन ठोस साक्ष्य सामने आने के बाद इस बार निर्णायक कार्रवाई की गई.
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एसपी की सख्ती से पुलिस महकमे में हड़कंप
एसपी केशव कुमार की इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप का माहौल है. प्रशासनिक हलकों में भी इस सख्ती की व्यापक चर्चा हो रही है. अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से भ्रष्ट प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा और ईमानदारी से काम करने वाले पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा.
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का जमीनी असर
उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में यह कार्रवाई बेहद अहम मानी जा रही है. कुशीनगर पुलिस की इस सख्ती से आम जनता का भरोसा पुलिस और प्रशासन पर और मजबूत हुआ है. यह कार्रवाई साफ दर्शाती है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है. कुशीनगर पुलिस की यह पहल सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है.
