कौन हैं हरीश राणा? जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने ‘इच्छामृत्यु’ की दी मंजूरी, फैसला सुनाते समय भावुक हुए जज
हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने 'इच्छामृत्यु' की इजाजत दी.
SC On Harish Rana: सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को ‘इच्छामृत्यु’ की मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने हरीश राणा का इलाज बंद करने की अनुमति दे दी है, जो पिछले 13 वर्षों से कोमा जैसी स्थिति में हैं और जिनके ठीक होने की उम्मीद न के बराबर है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एम्स को राणा को भर्ती करने और जीवन रक्षक प्रणाली हटाने की प्रक्रिया में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के मामले को लेकर उनके परिजनों की तारीफ की. कोर्ट ने कहा कि हरीश का परिवार कई सालों के बाद भी उनका साथ नहीं छोड़ा और देखभाल करता रहा. कोर्ट ने अपने फैसले में हरीश की लंबी बीमारी के दौरान उनके परिवार द्वारा दिखाए गए अटूट समर्थन को स्वीकार किया है. इसके बाद सुनवाई करते हुए ‘इच्छामृत्यु’ का फैसला सुनाया.
Supreme Court allows withdrawal of medical treatment to 32-year-old Harish Rana, who has been in a vegetative state for the last 13 years with negligible hope of recovery.
— ANI (@ANI) March 11, 2026
SC directs AIIMS Delhi to admit Rana and provide all facilities in carrying out the exercise of withdrawing…
कौन हैं हरीश राणा?
हरीश राणा गाजियाबाद के रहने वाले हैं. साल 2013 में वे जब पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र थे. उस दौरान वे पेइंग गेस्ट हॉस्टल की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे. इस दौरान उन्हें काफी चोंट और डॉक्टरों ने इलाज के बाद लाइफ सपोर्ट पर रख दिया. साल 2013 से लगातार हरीश राणा बेड पर लेटे हैं और सांस लेने के लिए ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब और खाने के लिए गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी ट्यूब ले रहे हैं.
13 साल से बिस्तर पर पड़े हैं हरीश राणा
हरीश राणा हादसे के बाद से 100 प्रतिशत विकलांगता और क्वाड्रिप्लेजिया से जूझ रहे थे. उनको सांस लेने, भोजन करने और देखभाल करने के लिए पूरी तरह से कृत्रिम चिकित्सा पद्धति का सहारा लेना पड़ता था. डॉक्टरों ने उनकी स्थिति में सुधार होने की संभावना को नकार दिया था. हरीश राणा को बिस्तर में पड़े करीब 13 साल हो गए हैं. लेकिन अब कोर्ट ने उन्होंने ‘इच्छामृत्यु’ की इजाजत दे दी है.
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सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के परिवार की याचिका पर फैसला सुनाया है. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने की है. हरीश राणा के परिजनों की ओर से रहे वकील मनीष जैन ने फैसले का स्वागत करते हुए ऐतिहासिक बताया है.