TMC ने 74 विधायकों का काटा पत्ता, फिर भी कई दागी MLA को किया रिपीट, हार से डरीं ममता?

Bengal Election: TMC ने दागी नेताओं का टिकट काटकर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि पार्टी में ऐसी लोगों के लिए जगह नहीं है, वहीं कुछ दागी नेताओं को भी टिकट दिया है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है. पार्टी ने ना सिर्फ दागी नेताओं का टिकट काटा है, बल्कि जिताऊ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है.
Mamata Banerjee

ममता बनर्जी

Bengal Election: पश्चिम बंगाल में पिछले 15 सालों से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने इस बार भारतीय जनता पार्टी की तर्ज कर दागी नेताओं के टिकट काट दिए हैं. टीएमसी का मानना है कि इससे पार्टी की छवि धूमिल होती है. इसलिए ऐसे नेताओं का टिकट काट दिया. टीएमसी ने इस बार के विधानसभा चुनाव में 74 मौजूदा विधायकों का टिकट काटा है. इन विधायकों के टिकट काटकर पार्टी अपनी साफ छवि साबित करना चाह रही है. वही पार्टी ने अभी भी कुछ ऐसे नेताओं को टिकट दिया है, जो दागी हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि जब दागी नेताओं का टिकट काटा ही गया, तो सभी दागी नेताओं का क्यों नहीं?

बंगाल में टीएमसी की सरकार 15 सालों से बरकरार है. जब कोई सरकार हो या नेता लगातार लंबे समय तक सत्ता पर बना रहता है, तो उसके खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी बढ़ जाती है और जनता के बीच नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में ममता बनर्जी ने साफ छवि को बरकरार रखने के लिए दागी नेताओं का टिकट ही सफाया कर दिया और उनकी जगह पर जमीनी कार्यकर्ता और साफ छवि के नेताओं को मौका दिया है. वहीं अभी भी ममता की टिकट वाली लिस्ट में कुछ दागी नेता बचे हुए हैं. जानें किन दागी नेताओं को मिला टिकट?

दागी के बावजूद इन नेताओं को मिला टिकट

ज्योतिप्रिय मलिक: ज्योतिप्रिय मलिक को हबरा विधानसभा से उम्मीदवार बनाया गया है. पांच बार विधायक रहने वाले मलिक पर राशन घोटाले का आरोप है. मलिक को 2023 में जेल भी जाना पड़ा था. इस दौरान उन्होंने 14 महीने की जेल काटी. फिर भी मलिक को टीएमसी ने उम्मीदवार बनाया है. अब सवाल ये भी उठता है कि आखिर क्या ये दागी विधायक नहीं है.

मलय घटक: मलय घटक कोयला तस्करी घोटाले में आरोपी बनाए गए थे. ममता ने इन्हें आसनसोल नॉर्थ से टिकट दे दिया है. मलय से कोयला तस्करी के मामले में कई बार ईडी और सीबीआई ने पूछताछ की है. हालांकि कोर्ट ने अभी दोषी नहीं ठहराया है. मलय पूर्व में कानून मंत्री भी रह चुके हैं.

परेश चंद्र अधिकारीः परेश चंद्र पर बेटी को गलत तरीके से शिक्षक की नौकरी दिलवाने का आरोप है. हालांकि कोर्ट ने इस मामले में बेटी की नौकरी को रद्द करते हुए वेतन भी वापस करने का आदेश दिया है. इसके बावजूद भी टीएमसी ने परेश चंद्र को मेखलीगंज से प्रत्याशी बनाया गया है.

चंद्रनाथ सिन्हाः चंद्रनाथ सिन्हा वर्तमान में कैबिनेट मंत्री हैं. इनके खिलाफ प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले का आरोप है. ईडी ने लेनदेन का जिक्र करते हुए चार्जशीट भी दाखिल की है. लेकिन सिंहा का टिकट इसके बावजूद भी नहीं कटाऔर उन्हें बोलपुर से उम्मीदवार बनाया गया है.

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एक ओर जहां पार्टी ने दागी नेताओं का टिकट काटकर यह संदेश देने का प्रयास की, कि पार्टी में ऐसी लोगों के लिए जगह नहीं है, वहीं कुछ दागी नेताओं को भी टिकट दिया है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है. पार्टी ने ना सिर्फ दागी नेताओं का टिकट काटा है, बल्कि जिताऊ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. चाहे वह दागी ही क्यों ना हों. टीएमसी के टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना बताया है.

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