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12 राज्यों में फैले कफ सिरप माफिया का भंडाफोड़, सरगना विनोद अग्रवाल की 9.50 करोड़ की संपत्ति सीज

Cough syrup mafia Vinod Agarwal

Cough syrup mafia Vinod Agarwal

मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले से नशे के खिलाफ एक बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई सामने आई है. मऊगंज पुलिस ने उस अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो ड्रग लाइसेंस की आड़ में देश के 12 से अधिक राज्यों में कोडीनयुक्त नशीली कफ सिरप की अवैध सप्लाई कर रहा था. इस नेटवर्क के सरगना कानपुर निवासी विनोद अग्रवाल की करीब 9.50 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी गई है. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि 350 से अधिक फर्जी फर्मों के माध्यम से करीब 20 लाख से ज्यादा कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें अवैध रूप से बाजार में खपाई गईं. यह नेटवर्क मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में सक्रिय था.

गाड़ा मोड़ पर फिल्मी अंदाज में पकड़ाई खेप

मामले की शुरुआत 28 मार्च 2025 को हुई, जब मुखबिर से मिली सूचना पर तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मऊगंज कस्बे के गाड़ा मोड़ के पास घेराबंदी की. पुलिस ने एक बिना नंबर की सफेद ग्लेंजा कार को रोककर तलाशी ली, जिसमें से 2160 शीशी ऑनरेक्स नशीली कफ सिरप बरामद हुई. इसकी कीमत करीब 4.21 लाख रुपये बताई गई. इस कार्रवाई में पुलिस ने अमित सिंह, अमोल तिवारी और आशीष पटेल को मौके से गिरफ्तार किया. आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8A(c), 21, 22 तथा औषधि नियंत्रण अधिनियम की धारा 5/13 के तहत मामला दर्ज किया गया.

जांच में खुलता गया अंतरराज्यीय नेटवर्क

पूछताछ और जांच के दौरान वाहन मालिक अनिरुद्ध सिंह और राहुल द्विवेदी निवासी पराई, थाना चितरंगी जिला सिंगरौली का नाम सामने आया. पुलिस को पता चला कि राहुल द्विवेदी इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी था और उसके तार मऊगंज, रीवा, सीधी, सिंगरौली और वाराणसी तक फैले हुए थे. आगे की जांच में सुमित केसरी नाम का डीलर सामने आया, जो फर्जी फर्मों के नाम पर बिलिंग कर नशीली कफ सिरप की सप्लाई करवाता था. इसके बाद मऊगंज पुलिस की टीम सीधे वाराणसी पहुंची और वहां जांच शुरू की.

50 पुलिसकर्मियों की संयुक्त SIT बनी

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश पुलिस की संयुक्त एसआईटी गठित की गई, जिसमें करीब 50 पुलिसकर्मी शामिल किए गए. इस टीम ने नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए कई राज्यों में जांच शुरू की. पूछताछ में सामने आया कि कानपुर निवासी विनोद अग्रवाल इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सप्लायर था, जो अलग-अलग राज्यों में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई करता था.

हरियाणा से गिरफ्तार हुआ सरगना

घटना के बाद से फरार चल रहे विनोद अग्रवाल पर मध्यप्रदेश पुलिस ने 10 हजार रुपये और उत्तरप्रदेश पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था. लंबे समय तक फरारी के बाद आखिरकार उत्तरप्रदेश पुलिस ने उसे हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद 9 मार्च 2026 को मऊगंज पुलिस ने आरोपी को कानपुर सेंट्रल जेल से पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की.

350 फर्जी फर्मों से चल रहा था करोड़ों का धंधा

पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह अपने सब-डीलर सुमित केसरी के जरिए बड़ी मात्रा में नशीली कफ सिरप की सप्लाई करता था. कानपुर डीसीपी के अनुसार आरोपी ने शुरुआत में 47 फर्मों को सप्लाई करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन जांच में सामने आया कि असल नेटवर्क 350 से अधिक फर्जी फर्मों तक फैला हुआ था. इनमें से कई फर्में केवल कागजों पर ही मौजूद पाई गईं.

9.50 करोड़ की संपत्ति फ्रीज

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी विनोद अग्रवाल की करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी है. इससे पहले वाराणसी कमिश्नरेट की सारनाथ पुलिस भी उसकी संपत्ति को फ्रीज कर चुकी थी.

आगे और बड़े खुलासों की संभावना

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और आने वाले समय में इस गिरोह से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं. मऊगंज पुलिस की यह कार्रवाई अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है.

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