मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर क्या बात की? जानें

Israel Iran War: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार की शाम ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर वर्तमान के हालात की जानकारी ली है.
S Jaishankar Iran call Seyed Abbas Araghchi

एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत की.

Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में इन दिनों तनाव की स्थिति बनी हुई है. इजरायल-ईरान जंग के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार की शाम ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर वर्तमान के हालात की जानकारी ली है. इसकी जानकारी खुद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दी है. मिडिल ईस्ट में संघर्ष पर शुरू होने के बाद एस जयशंकर ने तीसरी बार अब्बास अराघची से बातचीत की है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए लिखा, “आज शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ चल रहे संघर्ष से संबंधित नवीनतम घटनाक्रमों पर विस्तृत बातचीत हुई. हम संपर्क में रहने पर सहमत हुए.”

जयशंकर ने तीसरी बार की बातचीत

मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव और संघर्ष को लेकर एस जयशंकर ने सोमवार को संसद में कहा था कि मौजूद हालात को देखते हुए इस समय लीडरशिप लेवल पर ईरान के साथ कोई कॉन्टैक्ट करना साफ तौर पर काफी मुश्किल है. फिर भी कोशिशें की गई हैं. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि इस संघर्ष में ईरान के लीडरशिप लेवल पर कई लोगों की जान चली गई है. जयशंकर ने कहा कि इंडियन डायस्पोरा की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और एनर्जी सिक्योरिटी सबसे ऊपर है. बता दें, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बीच जयशंकर ने तीन बार फोन पर बाचतीत कर वर्तमान हालात की जानकारी ली है. उन्होने पहली बार 28 फरवरी और फिर दूसरी बार 5 मार्च को बातचीत की थी.

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खाड़ी देशों के संपर्क में

सोमवार को राज्यसभा में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “रविवार तक हमारे लगभग 67,000 नागरिक खाड़ी देशों से लौटने के लिए इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर चुके हैं. हम भारतीयों की सुरक्षा के लिए प्रतिपद्ध हैं. इसके लिए सीसीएस की बैठक में भी चर्चा हुई है. हमारी सरकार खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के संपर्क में है और हालात पर नजर बनाए हुए है. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के 3 जहाज हिंद महासागर में थे. ईरान ने डॉकिंग के लिए निवेदन किया तो हमने परमिशन दी और शरण दी.

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