Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में सभी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. चुनाव की डेट की घोषणा होते ही भारतीय जनता पार्टी ने अपने 144 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी, तो वहीं ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने एक ही बार में अपने सभी 291 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है. टीएमसी ने 3 सीटें अपने सहयोगी दलों को दी है. टीएमसी की लिस्ट ने इस बार सबको चौंका कर रख दिया है. क्योंकि इस लिस्ट में 74 मौजूदा विधायकों के नाम काट दिए गए हैं. टीएमसी ने ऐसा क्यों किया? आइए जानते हैं.
विशेषज्ञों की मानें तो ममता बनर्जी ने इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा के ‘नो-रिपीट’ फार्मूले को अपनाया है. भाजपा इस फार्मूले को कई चुनावों में आजमाती आई है. जिसका परिणाम काफी अच्छा देखने को मिला. ममता बनर्जी के लिए यह फार्मूला इसलिए भी जरूरी हो गया था, क्योंकि बंगाल में 15 सालों से टीएमसी की सरकार है. ऐसे में जब लंबे समय तक कोई सरकार रहती है तो उसके खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी बढ़ जाती है. जिससे निपटने के लिए ममता बनर्जी ने भी यह फार्मूला अपनाया है.
टीएमसी ने क्यों विधायकों का काटा टिकट?
जब लगातार चाहे किसी पार्टी की सरकार हो या कोई नेता जीतता आ रहा हो, तो उसके खिलाफ कई आरोप भी बढ़ते ही जाते हैं. टीएमसी ने वैसा ही किया. जिन विधायकों और मंत्रियों के खिलाफ चाहे भ्रष्टाचार के आरोप हो या कोई गंभीर आरोप, उन सभी के टिकट काट दिए गए हैं. ममता बनर्जी ऐसे विधायकों के टिकट काटकर अपने अपनी छवि अच्छी बनाने का प्रयास कर रही हैं. इसके अलावा जिताऊ उम्मीदवारों पर दांव लगा रही हैं.
दागी विधायकों के काटे टिकट
ममता बनर्जी ने इस बार सबसे ज्यादा दागी विधायकों के टिकट काटे हैं और ऐसे लोगों को टिकट देने में भी कमी की है, जिनके ऊपर पहले से ही आरोप लगे हैं. ममता बनर्जी ने इस बार कई दिग्गजों के भी टिकट काटे हैं. जिसमें पार्थ चटर्जी, कांचन मलिक, चिरंजीत चक्रवर्ती, माणिक भट्टाचार्य और जीवनकृष्ण साहा के नाम शामिल हैं. इन नेताओं के टिकट काटकर पार्टी ने यह भी संदेश देने का प्रयास किया है कि घोटालों के दाग के साथ कोई भी नेता चुनाव नहीं जीत सकता है.
जमीनी कार्यकर्ताओं पर टीएमसी का फोकस
ममता बनर्जी पहले उन सभी नेताओं को टिकट देती थी, जो काफी चर्चित रहे हैं. लेकिन इस बार पार्टी ने जमीन से जुड़े नेताओं पर ज्यादा फोकस किया है. कुछ ऐसे भी नेताओं के टिकट काटे हैं, कि उनकी जगह पर परिवार को उम्मीदवार बनाया है. वजह चाहे कुछ भी रही हो, लेकिन ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में कई नेताओं के टिकट काटकर सियासत में गर्मी पैदा कर दी है. अब देखना यह होगा कि ममता बनर्जी का यह फैक्टर कितना फायदेमंद साबित होता है. ममता चौथी बार सरकार बना पाती हैं या नहीं. इसके लिए 4 मई का इंतजार करना होगा.
