Chaitra Navratri 2025: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, मां कुष्मांडा की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. अगर आपके किसी भी काम में कोई भी बाधा आ रही हो तो मां कुष्मांडा की पूजा करने से वो दूर हो जाती है.
Chaitra Navratri 2025: मां चंद्रघंटा का रूप अत्यंत शांत, सौम्य और ममतामयी है. ये अपनी भक्तों पर दया बरसाती हैं. जो भी भक्त मां चंद्रघंटा की शरण में जाता है सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, मां चंद्रघंटा की पूजा से न केवल भौतिक सुख में वृद्धि होती है, बल्कि समाज में आपका प्रभाव भी बढ़ता है.
Chaitra Navratri 2025: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना से परिवार में सुख शांति और समृद्धि आई है. इस दिन विधि विधान से मां के दर्शन कर पूजा अर्चना करनी चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी ध्यान, ज्ञान और वैराग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं.
शनि का मीन राशि में गोचर एक खगोलीय सत्य है. इसे खारिज नहीं किया जा सकता. मीन राशि में शनि का प्रभाव कर्म और आध्यात्मिकता के संतुलन को दर्शाता है, लेकिन इसका परिणाम व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है.
Maha Shivratri: शिवरात्रि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती हैं लेकिन साल में एक शिवरात्रि ऐसी होती है जिसे महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है. ये शिवरात्रि फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ती है.
राजा ने ब्राह्मण को बुलाया और कहा, "अगर तुम दूसरा कंगन नहीं लाए, तो तुम्हें दंड मिलेगा." ब्राह्मण अब संकट में था. वह घबराया हुआ, सोचने लगा, "अब दूसरा कंगन कहां से लाऊं?" डरते हुए, वह संत रविदास के पास पहुंचा और सारी बात बताई.
1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के समय, आचार्य सत्येंद्र दास रामलला की मूर्ति की रक्षा करने में आगे आए थे. वह उस समय रामलला की मूर्ति के पास खड़े हो गए थे, ताकि कोई नुकसान न पहुंचा सके.
Magh Purnima 2025: माघ माह के शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को पूर्णिमा होती है. इस दिन महाकुंभ में करोड़ों लोग स्नान करेंगे. जिस कारण महाकुंभ में भयंकर भीड़ और ट्रैफिक का दबाव देखने को मिल रहा है.
Char Dham Yatra: उत्तराखंड प्रशासन ने बताया है कि बदरीनाथ के कपाट खुलने की तारीख 4 मई निर्धारित की गई है. अन्य तीनों धामों के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि और अक्षय तृतीया पर्व पर स्पष्ट हो जाएंगी.
Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में पहला अमृत स्नान मकर संक्रांति पर संपन्न हुआ था, जबकि दूसरा अमृत स्नान मौनी अमावस्या पर. वहीं अब अगला अमृत स्नान वसंत पंचमी के दिन होने वाला है.