सनातन संस्कृति में ब्रह्मध्वज का क्या महत्व है? महाकाल मंदिर से जुड़ी है परंपरा
महाकाल मंदिर के शिखर पर लगेगा ब्रह्मध्वज
Mahakal Temple Brahamdhwaj: सनातन धर्म संस्कृति में ब्रह्मध्वज का बड़ा महत्व माना जाता है. दो सौ करोड़ वर्ष पूर्ण से सनातन धर्म में गुड़ी पड़वा से ही हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत की शुरुआत हुई है. गुड़ी पड़वा पर हिन्दू नव वर्ष मनाया जाता है. बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल मंदिर के शिखर पर गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्मध्वज वैदिक मंत्रोच्चार कर लगाया जाएगा. महाकाल मंदिर के साथ अन्य सभी धार्मिक स्थलों पर ब्रम्हध्वज लगाया जाएगा
उज्जैन काल गणना का केंद्र
देश का दिल मध्य प्रदेश और राज्य की धार्मिक नगरी उज्जैन को काल गणना का केंद्र बिंदु कहा जाता है. धर्म की नगरी में साक्षात कालों के काल महाकाल विराजमान हैं. महाकाल मंदिर के शिखर पर गुड़ी पड़वा पर वैदिक मंत्रोच्चार कर ब्रह्मध्वज ध्वजारोहण किया जाएगा. सृष्टि कर्ता महाकाल की प्रेरणा से ब्रह्मदेव में सृष्टि का निर्माण किया.
उज्जैन को महाकाल की नगरी के साथ-साथ विक्रमादित्य का शहर होने का गौरव हासिल है. गुड़ी पड़वा पर्व को विक्रम संवत की शुरुआत हुई थी. काल की शुरुआत 1955885127 साल पहले प्रवर्तित सृष्टियाब्द के आरम्भ से मानी जाती है. कोटि सूर्य को महिमा प्रदान की गयी है. यह ब्रह्मध्वज वर्षों पूर्व परम्परा से महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर समय-समय पर स्थापित रहा है.
श्रीराम तिवारी ने क्या कहा?
सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ के निर्देशक श्रीराम तिवारी ने विस्तार न्यूज़ को बताया उज्जैन नगरी अति प्राचीन नगरी है और काल गणना का केंद्र बिंदु कहा जाता है. हर परंपरागत धर्म संस्कृति के अनुसार यहां परम्परा जीवित है. उज्जैन का पुराना वैभव लौटाने के लिए सीएम मोहन यादव ने कमान संभाली है. उन्हीं के प्रयास से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.
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उन्होंने आगे कहा कि हम सनातन धर्म संस्कृति के अनुसार हर साल मंदिरों के शिखर पर लगने वाला केसरिया रंग का ब्रह्मध्वज हमेशा ऊंचा रहे.