Mauganj News: सिविल अस्पताल में कलेक्टर की निगरानी भी बेअसर! गंदगी का लगा अंबार, इमरजेंसी सेवा ठप
मऊगंज के सिविल अस्पताल में अव्यवस्था फैली हुई है.
Input- लवकेश सिंह
MP News: अस्पताल को मंदिर और डॉक्टरों को भगवान कहा जाता है, लेकिन जब उसी मंदिर में गंदगी का अंबार हो, डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से गायब हों और इमरजेंसी सेवा तक ठप्प पड़ी हो तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन जाता है.
मऊगंज जिले का सिविल अस्पताल इन दिनों बदहाली और लापरवाही की ऐसी ही तस्वीर पेश कर रहा है, जहां मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें इलाज तो नहीं मिलता, उसकी जगह गंदगी, इंतजार और लाचार व्यवस्था मिलती है.
अस्पताल में गंदगी, बेड पर नहीं चादर
अस्पताल के कई वार्डों की हालत बेहद खराब बताई जा रही है. कई बेड पर बेडशीट तक नहीं है, वार्डों में साफ-सफाई की कमी साफ दिखाई देती है. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यहां इलाज से ज्यादा अव्यवस्था से जूझना पड़ रहा है. ओपीडी में भी कई बार डॉक्टर नदारद रहते हैं, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. वहीं इमरजेंसी सेवा की स्थिति भी सवालों के घेरे में है.
प्रशासन की निगरानी बेअसर
हैरानी की बात यह है कि जिले के कलेक्टर संजय जैन लगातार अस्पताल की व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं. कई बार औचक निरीक्षण भी किए गए हैं और लापरवाही के कारण कई डॉक्टरों को नोटिस तक जारी किए गए, लेकिन इन सब कार्रवाइयों के बावजूद अस्पताल की हालत में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा, जिससे व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
गरीब मरीजों पर सबसे ज्यादा असर
सूत्रों की मानें तो कुछ डॉक्टर सरकारी अस्पताल की ड्यूटी से ज्यादा ध्यान निजी अस्पतालों में दे रहे हैं. इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ रहा है, जो इलाज के लिए सरकारी अस्पताल का सहारा लेते हैं.
बड़ा सवाल आखिर कब सुधरेगा अस्पताल?
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासन निगरानी और कार्रवाई दोनों कर रहा है, तो आखिर मऊगंज सिविल अस्पताल की हालत सुधर क्यों नहीं रही? क्या जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर मरीजों की तकलीफें ऐसे ही जारी रहेंगी?
इलाज का मंदिर कहलाने वाला यह अस्पताल अगर यूं ही बदहाली में डूबा रहा तो सबसे बड़ी कीमत गरीब मरीजों को ही चुकानी पड़ेगी.
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