MP News: सड़क और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार, राज्य सरकार विकसित करेगी 6 बड़े आर्थिक कॉरिडोर
सांकेतिक तस्वीर
MP News: मध्यप्रदेश में सड़क और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार छह बड़े आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने जा रही है. इन कॉरिडोर की कुल लंबाई 3368 किलोमीटर होगी और इनके निर्माण पर करीब 36,483 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. इन परियोजनाओं का मकसद प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को तेज और आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ना है, जिससे उद्योग, व्यापार, पर्यटन और परिवहन गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.
जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने इन सभी परियोजनाओं को जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है. इन कॉरिडोर में नर्मदा प्रगतिपथ, विंध्य एक्सप्रेस-वे, मालवा-निमाड़ विकासपथ, अटल प्रगतिपथ, बुंदेलखंड विकासपथ और मध्यभारत विकासपथ शामिल हैं. इनमें से दो कॉरिडोर भोपाल से होकर गुजरेंगे, जबकि दो कॉरिडोर राजधानी के आसपास के क्षेत्रों को जोड़ेंगे.
परियोजनाओं का अंतिम प्रारूप तैयार
परियोजनाओं का अंतिम प्रारूप तैयार हो चुका है और इनके निर्माण का काम लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम मिलकर करेंगे. सरकार की योजना के अनुसार इन कॉरिडोर के जरिए प्रदेश को आठ हिस्सों में विभाजित करते हुए सड़क नेटवर्क को व्यवस्थित किया जाएगा. इससे प्रदेश के करीब 55 जिले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इनसे जुड़ जाएंगे.
इन जिलों को होगा सीधा फायदा
इन आर्थिक कॉरिडोर के बनने से प्रदेश के सभी जिलों तक सड़क संपर्क बेहतर होगा. विंध्य एक्सप्रेस-वे बनने से भोपाल सीधे सिंगरौली से जुड़ जाएगा. इस मार्ग में भोपाल, सागर, दमोह, कटनी और रीवा सहित करीब दस जिले आएंगे.
- मालवा-निमाड़ विकासपथ के जरिए मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा. गरोठ-उज्जैन 136 किलोमीटर और इंदौर-बुरहानपुर 215 किलोमीटर खंड पर काम जारी है.
- अटल प्रगतिपथ पश्चिम में दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा. इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे जिलों को फायदा होगा.
- बुंदेलखंड विकासपथ बनने से भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर के बीच सीधा संपर्क मजबूत होगा. इस मार्ग के जरिए भोपाल से छतरपुर की दूरी और समय दोनों कम होंगे.
- मध्यभारत विकासपथ से भीमबैठिका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल आपस में जुड़ेंगे. यह कॉरिडोर मुरैना से बैतूल तक सीधा मार्ग उपलब्ध कराएगा.
- वहीं नर्मदा प्रगतिपथ झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडोरी सहित करीब दस जिलों से होकर गुजरेगा. यह कॉरिडोर बिलासपुर-रायपुर से शुरू होकर गुजरात तक जुड़ेगा.
ये हैं प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे और प्रगतिपथ
- नर्मदा प्रगतिपथ – 867 किमी लंबाई, लागत 5,299 करोड़ रुपए, लक्ष्य जून 2028.
- विंध्य एक्सप्रेस-वे – 676 किमी लंबाई, लागत 3,809 करोड़ रुपए, लक्ष्य जून 2028.
- मालवा-निमाड़ विकासपथ – 450 किमी लंबाई, लागत 7,972 करोड़ रुपए, लक्ष्य दिसंबर 2027.
- अटल प्रगतिपथ – 299 किमी लंबाई, लागत 12,227 करोड़ रुपए, निर्माण जारी.
- बुंदेलखंड विकासपथ – 330 किमी लंबाई, लागत 3,357 करोड़ रुपए, लक्ष्य जून 2028.
- मध्यभारत विकासपथ – 746 किमी लंबाई, लागत 3,819 करोड़ रुपए, लक्ष्य जून 2028.
सरकार का मानना है कि इन आर्थिक कॉरिडोर के बनने से औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, माल परिवहन की लागत कम होगी और पर्यटन को नई गति मिलेगी. साथ ही दूर-दराज के जिलों तक आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से क्षेत्रीय संतुलित विकास को भी मजबूती मिलेगी.