Bhopal news: खनिज माफियाओं का नया तरीका, नंबर प्लेट पर ग्रीस लगाकर कैमरों को दे रहे चकमा
सांकेतिक तस्वीर
Bhopal news: प्रदेश में खनिजों के अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर रोक लगाने के लिए सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रही है. इसके तहत राज्य में 40 ई-चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं और 25 जिलों में कमांड सेंटर भी तैयार कर लिए गए हैं. विधि विभाग की मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की बैठक में रखा जाएगा.
अधिकृत सूत्रों के अनुसार खनिज विभाग ने राजधानी भोपाल के ओबेदुल्लागंज, ईंटखेड़ी और बंगरसिया सहित इंदौर के सानावदिया-नायता मुंडला बायपास जैसे प्रमुख मार्गों पर ई-चेक पोस्ट लगाए हैं. यहां अत्याधुनिक कैमरों के माध्यम से खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी की जाएगी. कैमरों की नंबर प्लेट पढ़ने की क्षमता लगभग 200 मीटर तक होगी.
कैमरों से बचने के नए तरीके
विभागीय जांच में सामने आया है कि अवैध खनिज परिवहन में लगे कई वाहन चालक कैमरों से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं. कुछ डंपरों की नंबर प्लेट पर ग्रीस लगा देते हैं, जबकि कई वाहन आधे-अधूरे नंबर लिखे हुए या नंबर प्लेट पर पट्टी चिपकाकर चलते पाए गए हैं. इससे कैमरों के लिए नंबर पढ़ना कठिन हो जाता है. कई मामलों में एक ही नंबर प्लेट का उपयोग कई डंपरों में कर खनिज ढोने की जानकारी भी सामने आई है. विभाग ऐसे वाहनों का अलग से डेटा तैयार कर रहा है.
वाहन मालिक के मोबाइल पर पहुंचेगा चालान
नई प्रणाली लागू होने के बाद यदि कोई वाहन अवैध खनिज परिवहन या ओवरलोडिंग करते पाया जाता है तो उसका नंबर सीधे नियंत्रण कक्ष में दर्ज होगा. वहां खदान से जारी ई-ट्रांजिट पास से उसका मिलान किया जाएगा. यदि वाहन नंबर या खनिज की मात्रा में अंतर पाया गया तो वाहन मालिक के मोबाइल पर ऑनलाइन चालान और सूचना भेज दी जाएगी. चालान जमा करने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा, इसके बाद अतिरिक्त दंड के साथ कार्रवाई की जाएगी.
डिजिटल चिप से होगी पहचान
खनिज परिवहन करने वाले वाहनों को फास्टटैग की तर्ज पर एक विशेष डिजिटल चिप भी दी जाएगी. इस चिप में वाहन का नंबर, भार क्षमता, चेसिस नंबर और वाहन मालिक से संबंधित जानकारी दर्ज रहेगी. यदि किसी कारण से कैमरा नंबर प्लेट पढ़ने में असफल रहता है तो चिप के माध्यम से वाहन की पहचान तुरंत हो सकेगी.
अन्य विभागों को भी मिलेगा लाभ
ई-चेक पोस्ट पर लगे कैमरों का उपयोग पुलिस और वन विभाग भी कर सकेंगे. इनके माध्यम से अपराधियों की पहचान, अवैध शराब की तस्करी, तेज रफ्तार वाहनों और लकड़ी के अवैध परिवहन जैसी गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा सकेगी. खनिज विभाग का मानना है कि डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू होने से अधिकारियों पर लगने वाले “पैसे लेकर वाहन छोड़ने” जैसे आरोपों में भी कमी आएगी, क्योंकि चालान कैमरों के आधार पर स्वतः ऑनलाइन जारी होगा और मानवीय हस्तक्षेप कम हो जाएगा.
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